Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 20, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
ततस्ततश्च पर्यस्तं लुठितं न च वृत्तिषु ।
नापरामृष्टतत्त्वार्थमस्माकं भगवन्मनः ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवन्, व्यवहार
चलाने के लिए इधर-उधर प्रेरित हुआ भी हम लोगों का मन राग आदि वृत्तियों में निमग्न और तत्त्व
विचार से शून्य कभी भी नहीं रहता