Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 20, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
निर्विकारे गतक्षोभे चात्मन्युपशमं गते ।
चित्तरङ्गाः प्रबुद्धाः स्मः पर्वणीव महाब्धयः ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
अपनी आत्मा के निर्विकार, क्षोभशून्य ओर शान्त हो
जाने के कारण चिद्रूप (चारों ओर से ब्रह्माकार वृत्तिरूप चन्द्रमा का उदय होने पर उत्कट हुए
बोधस्वरूप) तरंगवाले हम लोग, पूर्णिमा आदि पर्वकाल मेँ समुद्र की नाई, प्रबुद्ध हो गये हैं