Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 20, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
नातः परतरं किंचिन्मन्ये कुशलमात्मनः ।
सन्तो यदनुगम्यन्ते संत्यक्तसकलैषणाः ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
समस्त
एषणाओं की तिलांजलि देनेवाले सन्त, महात्मा अपने आगमन आदि से हम पर जो अनुग्रह करते
हैं, मैं अपनी आत्मा का इससे अधिक दूसरा कुशल नहीं मानता