Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 20, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
आपातमात्ररम्येभ्यो भोगेभ्यः किमवाप्यते ।
सत्सङ्गचिन्तामणितः सर्वसारमवाप्यते ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
ऊपर-ऊपर से रमणीय
दिखाई पडनेवाले विषय-भोगों से क्या प्राप्त होता है ? अर्थात् कुछ भी नहीं । सत्संगरूपी चिन्तामणि
से तो समस्त सारभूत ज्ञानवस्तु प्राप्त होती है