Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 21, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
पक्षीशपक्षपवना अमृताक्रान्तिसंगरे ।
यदा ववुः पतत्सिद्धास्तदायं नापतद्द्रुमः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
जिनके कारण बड़े-बड़े सिद्ध गिर रहे थे, ऐसे पक्षिराज गरुड (५) के पंखों के पवन
जब अमृत हरण के युद्ध में बह रहे थे, तब भी यह वृक्ष गिरा नहीं