Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 21, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
यदा समन्ततो मेरुः कालनेमिभुजान्तरे ।
किंचिदुन्मूलितोऽतिष्ठत्तदा नाकम्पत द्रुमः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
जब (तारकासुर युद्ध में) कालनेमि
की भुजाओं में मेरु पर्वत चारों ओर से उन्मूलित होकर अवस्थित था, तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं
हुआ था