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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 21, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

यदा क्षीरोदलोलाद्रिकन्दरानिलकम्पिताः । कल्पाभ्रपङ्क्तयश्चेरुस्तदा नाकम्पत द्रुमः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

क्षीर-सागर में चंचल हुए मन्दराचल की गुहाओं के वायुओं से मानों कम्पित हुई कल्पान्त की मेघपंक्तियाँ जब संचरण कर रही थी, तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं हुआ