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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 21, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

उन्मूलिताद्रीन्द्रशिला यदोत्पातानिला ववुः । आधूतमेरुतरवस्तदा नाकम्पत द्रुमः ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

जब पर्वतराज की शिलाओं का उन्मूलन कर देनेवाले ओर मेरुपर्वत के अन्यान्य वृक्षों को कम्पित कर देनेवाले प्रलय-कालीन वायु बह रहे थे, तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं हुआ