Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 21, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
यदा शेषाकृतिं रुद्रो नसमाप्तैकचेष्टिताम् ।
ययौ गरुत्मान्ब्रह्माण्डं तदा नाकम्पत द्रुमः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
आज भी जिसकी पृथ्वी धारणरूप चेष्टा समाप्त नहीं हुई है, ऐसी शेषाकृति को संकर्षण रुद्र
जब प्राप्त हुए, तव ओर जब गरुडजी पृथ्वी से उडकर ब्रह्माण्ड को गये, तब भी यह वृक्ष कम्पित
नहीं हुआ