Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 21, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
यदा कल्पानलशिखाः शैलाब्धिसकलोल्बणः ।
शेषः फणाभिस्तत्याज तदा नाकम्पत द्रुमः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रलयकाल में जब शेष ने फणाओं से, शेल, सागर एवं समस्त प्राणियों से सही न
जानेवाली प्रलयाग्नि शिखाएँ बाहर निकालीं तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं हुआ | (पुराण में यह बात
प्रसिद्ध है कि अन्त में प्रलय संकर्षण की मुखाग्नि से ही होता है ।)