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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 21, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

अगम्योऽयं समग्राणां लोकान्तरविहारिणाम् । भूतानां तेन तिष्ठाम इह साधो सुखेन वै ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

हे साधो, अन्य लोकों में विहार करनेवाले सभी प्राणियों का यह अत्यन्त अगम्य स्थान है, अतः यहाँ हम लोग अत्यन्त सुखपूर्वक रहते है