Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 21, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
हिरण्याक्षो धरापीठं द्वीपसप्तकवेष्टितम् ।
यदा जहार तरसा नाकम्पत तदा तरुः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
वेगपूर्वक अपहरण किया था, उस समय पृथ्वी पर स्थित होने के कारण इसके भी हरण, कम्पन
आदि की संभावना अवश्य थी, तथापि दिव्यप्रभाव की सामर्थ्य से इस कल्पवृक्ष मेँ तनिक भी कम्पन
नहीं हुआ