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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 21, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

यदा लोलायितवपुर्बभूवामरपर्वतः । सर्वतो दत्तसाम्याद्रिस्तदा नाकम्पत द्रुमः ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

(वराह भगवान द्वारा किये गये पृथ्वी के उद्धार के समय) खम्भ की आधारभूत शिला की नाई चारों ओर से समता के लिये आधाररूप से दिये गये पर्वतो से युक्त मेरूपर्वत जब कम्पित हुआ, तब भी यह वृक्ष कम्पित नहीं हुआ