Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 22, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
कृतं वाल्मीकिना चैतदधुना यत्करिष्यति ।
अन्यच्च प्रकटं लोके स्थितं ज्ञास्यसि कालतः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त ज्ञानशास्त्र के निर्माता महर्षि वाल्मीकि हैं और अब उनके द्वारा वसिष्ठ राम-संवादरूप
दूसरे वत्तीस हजार श्लोकात्मक महारामायणरूप ज्ञानशारत्र की जो रचना की जायेगी, उसका भी
दिव्यज्ञान की सामर्थ्य से मेँ स्मरण करता हूँ, आप भी समय आनेपर उसे जान जायेंगे