Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 22, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
कदाचिज्जायसे व्योम्नः कदाचिज्जायसे जलात् ।
कदाचिद्वायुतः शैलात्कदाचिज्जायसेऽनलात् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
“आठें जन्मो में क्या मैं ब्रह्माजी का ही पुत्र रहा ?” महाराज वस्निष्ठ के इस प्रश्न पर पक्षीन्द्र
भुशुण्डजी नहीं" यो उत्तर देते हैं।
हे मुने, आप किसी समय आकाश से उत्पन्न होते हैं, किसी समय जल से उत्पन्न होते हैं, किसी
समय वायु से उत्पन्न होते हैं, तो किसी समय पर्वत और अग्नि से उत्पन्न होते हैं