Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 23, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
तथापि यत्पृच्छसि मां तत्ते प्रकथयाम्यहम् ।
आज्ञाचरणमेवाहुर्मुख्यमाराधनं सताम् ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
यद्यपि वैसी स्थिति है, तथापि आज जो मुझसे पूछते
हैं, उसका आपको मैं उत्तर देता हूँ, क्योकि आज्ञा का परिपालन करना ही सज्जनों की सबसे बड़ी
सेवा है, ऐसा मुनि लोग कहते हैं