Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 23, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 23, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 23 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
निःश्वासवृक्षक्रकचाः सर्वदेहलताघुणाः ।
आधयो यं न भिन्दन्ति मृत्युस्तं न जिघांसति ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
ब्रह्मन्, देह-वृक्ष का उच्छेद कर देनेवाले निःश्वासरूपी करवत जिनसे उत्पन्न होते हैं तथा
समस्त शरीर-लता के (देह-वृक्ष शाखाभूत हाथ, पैर आदि के) लिए जो घुनरूप हैं, वे मानसिक-
व्यथाएँ जिसका भेदन नहीं करतीं, उसे मृत्यु मारने की इच्छा नहीं करती