Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 24, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 24, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 24 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
पश्येदं भगवन्सर्वं देहगेहं मनोरमम् ।
त्रिप्रकारमहास्थूणं नवद्वारसमावृतम् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
भगवन्, इस समस्त देहरूपी मनोहर
घर को देखिए, इसमें वात, पित्त और कफ, ये त्रिविध दोष बड़े-बड़े विधारक काष्ठ यानी खंभे लगे हुए
हैं ओर यह नव द्वारों से भलीभाँति आवृत है