Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 25, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
पश्चादाप्याययत्येष निमेषसमनन्तरम् ।
अपानशशिनोऽन्तस्था कला प्राणविवस्वता ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
अपानरूप
चन्द्रमा के भीतर की एक कला का प्राणरूपी सूर्य के साथ जिस ब्रह्मरूप प्रदेश में सम्बन्ध हुआ है,
उस ब्रह्म पद को प्राप्त कर पुरुष पुनः शोक को प्राप्त नहीं करता