Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 25, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 25, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 25 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
एतत्तदात्मनो रूपं शुद्धैषा परमैव चित् ।
एतत्तत्तत्सदाभासमेतत्प्राप्य न शोच्यते ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
यही
आत्मा का असली स्वरूप है ओर यही अशेष मलों से निर्मुक्त सूर्य, चन्द्र आदि प्रकाशमान पदार्थो की
प्रकाशक परम चिति है, यही तत्-तत् जागतिक पदार्थो का अवभासक प्रकाश है और इसीको प्राप्त
कर मनुष्य शोकग्रस्त नहीं होता