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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 26, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

एतां दृष्टिमवष्टभ्य संस्थितोऽस्मि महामुने । न चलामि निमेषांशमपि मेरुविचालतः ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

हे महामुने, मैं इस प्राणदृष्टि का अवलम्बन कर दृढ़तापूर्वक अवस्थित रहता हूँ । इसलिए सुमेरु पर्वत के विचलन से भी निमेषांशमात्रकाल के लिए भी विचलित नहीं होता