Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 26, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 26, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 26 · श्लोक 36
संस्कृत श्लोक
नाहमस्मि न चान्यो मे नाहमन्यस्य कस्यचित् ।
इति मे भावितं चित्तं तेन जीवाम्यनामयः ॥ ३६ ॥
हिन्दी अर्थ
न मैं हूँ, न मेरे लिए कोई दूसरा है और न मैं किसी दूसरे के लिए हूँ, इस प्रकार की भावना से
मेरा चित्त भावित है, अतएव मेँ अनामय होकर चिरंजीवी हूँ