Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 27, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 27, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 27 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
इत्याकर्ण्य भुशुण्डोऽसौ जग्राहोत्थाय पादपात् ।
संकल्पिताभ्यां हस्ताभ्यामुपात्तं हेमपल्लवम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
(सुवर्णपल्लवमय पात्रका) ग्रहण किया