Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 27, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 27, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 27 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
कल्पवृक्षलतापुष्पकेसरेण हिमत्विषा ।
तत्पात्रं मौक्तिकार्घ्येण पूरयामास पूर्णधीः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर पूर्णप्रज्ञ उस वायसराज ने कल्पवृक्ष की लता
के पुष्प केसरो से युक्त हिम के सदृश कान्तिवाले अर्घोपयोगी मोतीरूपी जल से उस पात्र को भर
दिया