Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 27, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 27, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 27 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
तदस्तु तव कल्याणं प्रविशात्मगुहां शुभाम् ।
मध्याह्नसमयो यन्मे व्रजामि सुरमन्दिरम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
पक्षिराज, तुम्हारा कल्याण हो, तुम अपनी शुभ गुहा में प्रवेश करो, अब
मध्याह-कर्तव्य के लिए मेरा समय हो गया है, अतः मैं भी अपने घर सप्तर्षि लोक में जा रहा हूँ