Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 27, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 27, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 27 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
अनुव्रज्याकदर्थेन खगेन्द्रालमिति ब्रुवन् ।
विष्टरादहमुत्थाय ततः खगवदाप्लुतः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर हे खगेन्द्र, आप मेरे पीछे चलने के लिए अधिक श्रम न करें । इस प्रकार कहता
हुआ मैं आसन से उठकर पक्षी की नाई उड गया