Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 27, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 27, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 27 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
व्योम्नि योजनमात्रं तु मदनुव्रज्यया गतः ।
करं करेणावष्टभ्य बलात्संरोधितः खगः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, मेरे पीछे-पीछे अनुगमन द्वारा
आकाश में वह पक्षिराज एक योजन तक चलता रहा । इसके बाद मैने अपने हाथ से उसका हाथ
पकड़कर बलपूर्वक उसे रोक दिया