Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 62
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 62
संस्कृत श्लोक
नास्तमेति न चोदेति न शान्तं परितप्यते ।
परतामेव नाशान्तामनुत्तमपदे स्थितः ॥ ६२ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, जिस प्रकार तित्तिरी घोंसला
बनाने के लिए तिनकों के निम्नभाग के मोटे अंशों को छोड़कर ऊपर के कोमल भागों का ही ग्रहण
करती है, उसी प्रकार सबसे श्रेष्ठ ब्रह्मपद में स्थित हुआ तत्त्वज्ञानी द्वैतबाध से परिशिष्ट ब्रह्मरूपता का
ही अवलम्बन करता है, प्रतीतिकालीन जड-स्वरूपता का नहीं