Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 75
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 75 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 75
संस्कृत श्लोक
तत्सर्वं प्राप्यते राम रागद्वेषपरिक्षयात् ।
रागादिहतया बुद्ध्या यादृग्राम विचेष्टितम् ॥ ७५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी,
राग आदि दोषों से आक्रान्त हुई बुद्धि के द्वारा जैसा जो कुछ किया जाता है, वह सब कुछ मूढो के लिए
तत्काल ही विपरीतरूप (दुःखरूप) हो जाता है