Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 76
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 28, verse 76 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 76
संस्कृत श्लोक
तत्तदेव प्रयात्याशु मूढानां विपरीतताम् ।
द्वेषदोषोर्मिरुद्धासु न गुणाश्चित्तवृत्तिषु ॥ ७६ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, जिस प्रकार दग्ध हुई वनस्थलियों मे हिरन
अपना स्थान नहीं बनाते, उसी प्रकार द्वेष-दोषरूपी ऊर्मियों से आक्रान्त चित्तवृत्तियों में उत्तम गुण
अपना स्थान नहीं बनाते