Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 123
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 123 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 123
संस्कृत श्लोक
तदेव देवशब्देन कथ्यते तत्प्रपूजयेत् ।
तदेवास्ति यतः सर्वं सत्तासत्तात्मरूपधृक् ॥ १२३ ॥
हिन्दी अर्थ
चूँकि, जगत, जीव और
उसका संसार - ये सब उसकी सत्ता से ही अस्तित्वरूप अपना स्वरूप धारण करते हैं, इसलिए
एकमात्र वह चिति ही विद्यमान वस्तु है, दूसरी नहीं । वही देवशब्द से व्यवहृत होती है, इसलिए उसी
की पूजा करनी चाहिए