Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 124
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 124 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 124
संस्कृत श्लोक
अज्ञातशिवतत्त्वानामाकाराद्यर्चनं कृतम् ।
योजनाध्वन्यशक्तस्य क्रोशाध्वा परिकल्प्यते ॥ १२४ ॥
हिन्दी अर्थ
तब क्या पुण्डरीकाक्ष आदि मूर्तियों की पूजा का जो विधान है, वह व्यर्थ है ? इस पर नहीं, ऐसा
उत्तर देते हैं।
ब्रह्मन्, जो परम शिवतत्त्व से अपरिचित हैं, उन्हींके लिए पुण्डरीकाक्ष आदि मूर्तियों का पूजन
विहित है। ठीक ही है, योजनपरिमित मार्गमे अशक्त पुरुष के लिए क्रोश-परिमित मार्ग की कल्पना की
जाती है