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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 126

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 126 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 126

संस्कृत श्लोक

अकृत्रिमफलं त्यक्त्वा यः कृत्रिमफलं व्रजेत् । त्यक्त्वा स मन्दारवनं कारञ्जं याति काननम् ॥ १२६ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि शंका हो कि कृत्रिम विषयभोग अनात्म-पूजन से ही सिद्ध होते हैं, इसलिए उनके लाभार्थ कृत्रिम-पूजा करनी चाहिए ? तो इस पर कहते हैं। स्वाभाविक निरतिशयानन्दरूप फल छोड़कर जो पुरुष कृत्रिम फल की ओर प्रवृत्ति करता है, उसके विषय में यही कहना चाहिए कि वह देवतरू मन्दार का वन छोड़कर कंजा-वन की ओर प्रवृत्ति करता हे