Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 128
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 128 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 128
संस्कृत श्लोक
शमबोधादिभिः पुष्पैर्देव आत्मा यदर्च्यते ।
तत्तु देवार्चनं विद्धि नाकारार्चनमर्चनम् ॥ १२८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महर्षे, प्रकाशमान आत्मदेव की शम, बोध आदि पुष्पों से जो पूजा की जाती है,
उसीको आप देवार्चन जानिए, मूर्ति - पूजा को देवार्चन मत जानिए