Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
हतं च हन्यमानं च दृश्यते देहचक्रकम् ।
धीरतामलमालम्ब्य घनभ्रममिमं त्यजेत् ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए हे भद्र, उत्तम धैर्य का भली प्रकार
अवलम्बन कर इस अनादि दृढीभूत भ्रम का परित्याग कर देना चाहिए