Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 68
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 68 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 68
संस्कृत श्लोक
चित्तयक्षदृढाक्रान्तं न शास्त्राणि न बान्धवाः ।
शक्नुवन्ति परित्रातुं गुरवो न च मानवम् ॥ ६८ ॥
हिन्दी अर्थ
चित्तरूपी यक्ष से दृढतापूर्वक दबाये
गये मनुष्य की न शास्त्र, न बन्धु और न गुरु ही भलीभाँति रक्षा कर सकते हैं