Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 70
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 70 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 70
संस्कृत श्लोक
अस्मिञ्जगच्छून्यपुरे सर्वमेव प्रदूषितम् ।
देहगेहं प्रमत्तेन चित्तयक्षेण वल्गता ॥ ७० ॥
हिन्दी अर्थ
इस
जगतरूपी शून्य-नगर में सभी देहरूपी घर मदोन्मत्त तथा व्यर्थ की गर्जना करनेवाले चित्तरूपी यक्ष ने
भलीर्भोति दूषित कर दिये हैँ ।