Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 95
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 95 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 95
संस्कृत श्लोक
शुभ्राभ्रशतसंकाशं चन्द्रबिम्बगणोपमम् ।
प्रकटीकृतदिक्कुञ्ज तदालोक्य मया स्मयात् ॥ ९५ ॥
हिन्दी अर्थ
उस तेज की चकाचौंध
से दिशाओं के समस्त कुज चमक उठे। मैने बड़ विस्मय के साथ देखा ओर देखकर भीतर की प्रकाशमान
दिव्यदृष्टि से उसके विषय में विचारा ओर तदनन्तर फिर बाह्यदुष्टि से तत्-तत् विशेष-अवयवों के
अनुसन्धानपूर्वक उसका अवलोकन किया