Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 30, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
ईश्वर उवाच ।
एवं सर्वमिदं विश्वं परमात्मैव केवलम् ।
ब्रह्मैव परमाकाशमेष देवः परः स्मृतः ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
“चेतनाकाशमात्रात्म यथा सर्वमिदं प्रभो“ यह जो तुमने पूछा था, उसका यह उत्तर दिया, यों
कहते हैँ ।
ईश्वर ने कहा : ब्रह्मन्, इस रीति से यह समस्त संसार एकमात्र परमात्मस्वरूप ही है, ब्रह्म ही परम
आकाश है ओर यही सबसे बड़ा देव कहा गया हे
सर्ग सन्दर्भ
उनतीसवाँ सर्ग समाप्त तीसवोँ सर्म चिति की सर्वात्मता सर्वभोक्त॒भाव से स्थिति ओर वह जिस प्रकार से जीवदशा को प्राप्त हुई - इन सबका वर्णन ।