Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 30, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
तदेतत्पूजनं श्रेयस्तस्मात्सर्वमवाप्यते ।
तदेव सर्गभूः सर्वमिदं तस्मिन्व्यवस्थितम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
सृष्टि के आरोप का अधिष्ठान है और उसी में यह सब व्यवस्थित है