Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 104
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 30, verse 104 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 104
संस्कृत श्लोक
बिभेत्यथ स्वसंकल्पात्स्वशब्दादिव गर्दभी ।
नानया सदृगन्यास्ति मुग्धा बाला चलाऽबला ॥ १०४ ॥
हिन्दी अर्थ
अपने शब्द से गदही की तरह यह चिति अपने ही
संकल्प से डरती है इसके सदृश दूसरी कोई भी मुग्धा, चंचला एवं अर्बला बाला नहीं है