Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 105
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 30, verse 105 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 105
संस्कृत श्लोक
एषा सा कथिता तुभ्यं जीवशक्तिर्महामुने ।
प्राकृताचारविवशा वराकी पशुधर्मिणी ॥ १०५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
महामुने, यह तुमसे उस जीवशक्ति का निरूपण किया, जो वेचारी प्राकृत आचारो से पराधीन एवं
पशुओं के सदृश अनियन्त्रित धर्मवाली है