Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 106
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 30, verse 106 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 106
संस्कृत श्लोक
कर्मात्मेत्यभिधां प्राप्ता शोच्यास्य परमात्मनः ।
अनन्तं दुःखबहुलं स्वयं विभ्रममाश्रिता ॥ १०६ ॥
हिन्दी अर्थ
मुनिवर, असीम दुःखपूर्ण विभ्रमों का स्वयं आश्रय
करनेवाली "कर्मात्मा" (कमनुसारस्वभावा) इस नाम को प्राप्त हुई इस परमात्मा की यह शक्ति सचमुच
शोचनीय है