Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 107
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 30, verse 107 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 107
संस्कृत श्लोक
असदेवानयाक्रान्तं विनाशि सहजं मलम् ।
तण्डुलेनेव कञ्चूकमनन्ययाऽव्यवस्थितम् ॥ १०७ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वभिन्न सत्ता-स्फूर्ति से रहित, अविद्या से अनियत, विनाशी ओर स्वाभाविक
मलरूप असत् के ऊपर ही इसने ऐसे आक्रमण किया है, जैसे तण्डुल (चावल) ने तुष (भूसी) के
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