Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 33, Verse 32

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 33, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 32

संस्कृत श्लोक

यत्स्वसंकल्परचितमसंकल्पक्षयं हि तत् । यथा मुने मनोराज्यं गन्धर्वनगरं यथा ॥ ३२ ॥

हिन्दी अर्थ

हे मुने, अपने संकल्प से निर्मित मनोराज्य और गन्धर्वनगर की नाई जो वस्तु अपने संकल्प से बनायी गई है, वह संकल्प के अभाव से नष्ट हो जाती है, यह प्रसिद्ध बात हे