Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 33, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 33, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
पुष्टसंकल्पमात्रेण यदिदं दुःखमागतम् ।
तदसंकल्पमात्रेण क्षयि कात्र कदर्थना ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
केवल दृढ संकल्प से जो यह संसाररूपी दुःख प्राप्त हुआ है, वह केवल संकल्प के अभाव
से ही नष्ट हो जायेगा, फिर इस विषय में क्लेश ही क्या ?