Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 33, Verses 36–37

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 33, verses 36–37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

संकल्पव्यालनिर्मुक्ता न यदा तव चेतना । न तदा नन्दनोद्याने त्वमुच्चैः परिराजसे ॥ ३६ ॥ स्वविवेकानिलैः कृत्वा संकल्पजलदक्षयम् । परां निर्मलतामेहि शरदीव नभोन्तरम् ॥ ३७ ॥

हिन्दी अर्थ

महर्षे, जब तक तुम्हारी बुद्धि संकल्परूप सर्पं से निःशेष मुक्त नहीं होती, तब तक सर्वविध गुणों से उत्कृष्ट नन्दनवन में उच्च स्थान पर स्थित हुए भी तुम क्लेशरहित होकर शोभित नहीं हो सकते