Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 33, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 33, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
संकल्पानिलनिर्धूतं भ्रान्तं पर्णतृणांशवत् ।
भूताकाशे चिदात्मानमवलम्ब्य विलोकय ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
संकल्परूप पवन से कम्पित हुए, पत्तों एवं तिनकों के टुकड़ों की नाई प्राणीमात्र के हृदयाकाश में भ्रमण
कर रहे इस चिदात्मा का, विवेक का आश्रय लेकर, साक्षात्कार करो