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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 33, Verse 40

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 33, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 40

संस्कृत श्लोक

स्वसंकल्पनकालुष्यं विनिवार्यात्मनात्मनः । परं प्रसादमासाद्य परमानन्दवान्भव ॥ ४० ॥

हिन्दी अर्थ

अपने-आप अपनी संकल्पात्मक कालिमा का निवारण करके आत्मा की उत्तम विशुद्धता प्राप्तकर अविनाशी आनन्दरूप हो जाओ