Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 33, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 33, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
तृष्णाकरञ्जलतिकामिमां रूढिमुपागताम् ।
संकल्पमूलोद्धरणात्परिशोषवतीं कुरु ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महर्षे, संकल्परूप जड उखाडकर अत्यन्त दढता को प्राप्त हुई इस तृष्णारूपी करंज लता
को तुम सुखा डालो